Shravan Month को सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है।

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Shravan Month
Shravan Month

श्रावण मास (Shravan Month) का विशेष महत्व है

 

Shravan Month (सावन) को सभी माह में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
इसका विशेष कारण यह भी है कि इस माह को भगवान शिव को समर्पित किया गया है।
श्रावण मास में पूजा हवन इत्यादि भी बहुत किये जाते हैं।
श्रावण मास में पृथ्वी श्रंगार रूप धारण किये होती है।
यानि कि प्रकृति अपने सौंदर्य रूप को धारण करती है।
कहतें हैं श्रावण माह में ही प्रकृति और आकाश के मिलन के पश्चात जो पूर्ण आनंद की प्राप्ति होती है अर्थात वही वर्षा के रूप में हमे ग्रहण होती है।
वर्षा ऋतु के पृथ्वी पर नई फ़सलें और हरियाली आती है जो कि मानव जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
इसलिए भी यह मास अतिउत्तम माना जाता है।

श्रावण मास
श्रावण मास

Shravan Month में ही समुंद्र मंथन हुआ था।

 

हिन्दू धर्मों के ग्रंथों के अनुसार श्रावण मास में ही देवताओं अथवा दैत्यों के द्वारा समुन्द्र मंथन किया गया था ।
श्रावण में ही समुन्द्र में से 14 रत्नों की प्राप्ति हुई थी।
माँ लक्ष्मी भी समुन्द्र मंथन से ही प्रकट हुईं थीं इस लिये इस माह में माँ लक्ष्मी की अति कृपा रहती है।
जैसे कि हम सब जानते हैं समुन्द्र मंथन से हलाहल विष भी निकला था जिसके कारण सम्पूर्ण प्रथ्वी पर हाहाकार मच गया था।
उस विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था जिसके कारण भगवान शिव का एक नाम नील कंठ महादेव पड़ा।
इसलिए भी श्रावण का अधिक महत्व है।

Shravan Month में भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए।

श्रावण मास के कुछ विशेष नियम भी हैं-

1- नित्य सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए,
2- नित्य शिवालय में जायें, जलाभिषेक करें, बिल्वपत्र, पंचामृत इत्यादि से पूजा करें,
3- मास – मदिरापान का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें।
ऐसा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

श्रावण मास
Shravan Month

अमरनाथ गुफा में अमर कथा।

 

कहतें हैं इस मास में ही भगवान शिव ने माता पार्वती जी को अमर कथा सुनाई थी।
जिस स्थान पर अमर कथा कही गई थी आज उस स्थान को अमरनाथ गुफा कहते हैं।
उल्लेख तो यह भी मिलता है कि शिव पुराण को भी श्रावण माह में ही लिखा गया था।
Shravan Month में शिव पुराण का भी नित्य पाठ करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शिव पुराण-

शिवपुराण में 24000 श्लोक हैं और सात संहिताएँ बताई गई हैं।

विद्येश्वर संहिता,
रूद्र संहिता,
शतरूद्र संहिता,
कोटीरूद्र संहिता,
उमा संहिता,
कैलाश संहिता और वायवीय संहिता ।

श्रावण माह।

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