Sevan Chakra

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chakras
Chakras

मनुष्य शरीर के Sevan Chakra

 

शरीर में मूल रूप से Sevan Chakra होते हैं।
यह सृष्टि की समस्त शक्तियों का केंद्र है।
जानते हैं इन चक्रों के विषय में-

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1. मूलाधार चक्र

mooladhar chakra

मूलाधार चक्र गुदा एवं लिंग के बीच 4 पंखुरियों वाला यह आधार चक्र है। 99% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है। जिनके जीवन में भोग, संभोग एवं निद्रा ही है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के पास रहती है।
मूलाधार चक्र के जाग्रत होने पर मनुष्य वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव महसूस करने लगता है।

 

2. स्वाधिष्ठान चक्र

swadhishthan chakra

स्वाधिष्ठान चक्र जो लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर की ओर है जिसकी 6 पंखुरियां हैं।
जो मनुष्य अपनी ऊर्जा इस चक्र तक सीमित रखते हैं।
वह जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना एवं मौज-मस्ती करने में ही समाप्त कर देते हैं।
स्वाधिष्ठान चक्र के जागृत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास एवं दुर्गणों से मुक्ति मिलती है।

3. मणिपुर चक्र

manipur chakra

मणिपुर चक्र नाभि के मूल में स्थित है जिसकी 10 कमल पंखुरियां हैं।
जिस मनुष्य की ऊर्जा यहां तक रहती है उसका काम करने में मन लगता है।
ऐसे मनुष्यों को कर्मयोगी कहते हैं।
यह दुनिया का हर कार्य करने के लिए तत्पर रहते हैं।
मूलाधार चक्र जाग्रत होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा एवं मोह इन सब से मुक्ति मिलती है।
यह चक्र आत्मशक्ति प्रदान करता है।

 

4. अनाहत चक्र

anahat chakra

हृदयस्थल में 12 कमल की पंखुड़ियों सहित 12 स्वर्णाक्षर विद्यमान हैं।
यदि आपकी ऊर्जा अनाहत चक्र में एकत्रित है।
तब आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे।
हर क्षण आप कुछ न कुछ नया करने के लिए उत्सुक रहते हैं।आप चित्रकार, कवि, कहानीकार एवं इंजीनियर इत्यादि हो सकते हैं।
अनाहत चक्र के जागृत होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ, अविवेक एवं अहंकार समाप्त हो जाता है। इस चक्र के जाग्रत होने पर मनुष्य में प्रेम, संवेदना, आत्मविश्वास, चरित्र एवं मानवता के प्रति भावनायें स्वत: ही प्रकट होने लग जाती हैं।

 

5. विशुद्ध चक्र

vishudhd chakra

विशुद्ध चक्र कंठ में माँ सरस्वती के साथ विराजमान है।
जिसमें 16 पंखुरियों हैं।
जिस मनुष्य की ऊर्जा इस चक्र पर एकत्रित है वह शक्तिशाली होते हैं।
विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने से 16 कलाओं और 16 विभूतियों का ज्ञान हो जाता है।
भूख, प्यास एवं मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है।

 

6. आज्ञाचक्र

aagya chakra

आज्ञाचक्र दोनों आंखों के मध्य भृकुटी में होता है।
जिस मनुष्य की ऊर्जा यहां पर सक्रिय है वह बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है।
यही बौद्धिक सिद्धि है।
आज्ञाचक्र पर अपार शक्तियां एवं सिद्धियां निवास करती हैं।
यह मनुष्य सिद्धपुरुष बन जाते हैं।

 

7. सहस्रार चक्र

sahstrar chakra

सहस्रार चक्र मस्तिष्क के मध्य भाग में होता है।
यदि मनुष्य यम एवं नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया तब वह आनंदमय शरीर धारण कर लेता है।
इन मनुष्य को संसार, संन्यास और सिद्धियों की जरूरत ही नहीं रहती है।
मूलाधार चक्र से होते हुए ही सहस्रार चक्र तक पहुंचा जा सकता है।
यह मनुष्य परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है।
यही मोक्ष का द्वार है।

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