Save water save life जल ही जीवन है।

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Save Water Save Life
Save Water Save Life

Save Water Save Life – पानी बचाओ अभियान

जल ही जीवन है ये तो बहुत सुना होगा क्या यह सत्य है इस पर कुछ विचार करते हैं। और जानते हैं अनमोल जल के महत्व को क्या सच में Save Water Save Life वाला स्लोगन कितना सत्य है।

Save water save life जल ही जीवन है

जैसे कि हम जानते ही हैं बिना पानी के हम 2 क्षण नहीं रह सकते। यहां तक कि अपना भोजन भी नहीं बना सकते। जल इतना महत्वपूर्ण है कि इसके बिना हमारे शरीर का भी अस्तित्व नहीं रहेगा। पांच तत्व में से 1 तत्व जल है। और वो भी सबसे अधिक मात्रा में जल होता है। चाहें वह शरीर मानव का हो या जानवर का पानी के बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं है। तभी तो कहते हैं। SaveWaterSaveLife जल ही जीवन है।

 

Save Water Save Arth

बिना जल के प्रथ्वी का भी कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है। क्योंकि पानी नहीं तो पेड़ नहीं, पेड़ नहीं तो प्रथ्वी भी नहीं। पानी के बिना यह वातावरण समाप्त हो जाएगा। ऑक्सीजन समाप्त हो जाएगी जल के और पेड़ों के बिना यानी की यूं कहें कि जल के अर्थ का कोई अस्तित्व नहीं रह जायेगा। तभी तो यह स्लोगन फिर बैठता है पानी है तो जीवन है। Save Water Save Life इस लाइन को कभी मत भूलना यही इस भूमि पर सत्य है।🙏

 

पानी बचाओ अभियान

भारत सहित दुनिया की सभी सरकारें Save Water Save Life जैसे स्लोगन देती रहती हैं। पानी बचाओ अभियान भी खूब चलाए जाते हैं। लेकिन नतीज़ा वही का वही रहता है। रेलवे स्टेशन की जिस दीवार पर लिखा होता है। पानी बचाओ, जल ही जीवन है, Save Water Save Life, उसी दीवार पर नीचे लगी टोटी से बहता हुआ पानी सबकी पोल खोल देता है। कुछ पैसे बचाने के लिए सस्ती टोटियां लगवादी जाती हैं। जो एक सप्ताह में ही ख़राब हो कर भ्रष्टाचार की भी पोल खोल देती हैं।

यह नज़ारा पूरे भारत में मिल जाता है चाहें वो दिल्ली का न्यू रेलवे स्टेशन हो या बिहार के छोटे से गांव का स्टेशन या राजधानी का बस स्टॉप हो या सरकारी स्कूल और अस्पताल सब जगहों पर यही हाल है। आखि़र क्या संदेश देना चाहते हैं हम Save Water Save Life का नारा लगा कर। कब व्यवस्था बदलेगी कब पानी बचाने के लिए हम सीरियस होंगे जब पानी ख़तम हो जायेगा। दुनिया पानी की बूंद बूंद के लिए तरसेगी जब हम सोचेंगे पानी बचाया जाए।

मेरा आप सब से निवेदन है सरकारें कुछ नहीं करेंगी को करना है हमें ही करना है। हम अपने घर में तो पानी बचा ही सकते हैं स्टेशन पर खुली हुई टोटी देख कर हम बंद भी कर सकते हैं।

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बारिश का बहता पानी

बारिश का बहता हुआ पानी तो हम क्या बचायेंगे हम तो ज़मीन से भी पानी निकाल कर बहा देते हैं। सुबह सुबह अगर आप मॉर्निंग वॉक पर निकलोगे तो आपको दो तीन अंकल तो मिल ही जायेंगे जो पानी का पाइप हाथ में लेकर सड़क साफ़ करने के बहाने पानी बहा रहे होते हैं। ना उनको कोई रोकने वाला है और ना कोई ऐसा कानून जो उनसे इस पानी का हिसाब ले सके। किसी को कोई मतलब ही नहीं है क्योंकि सुबह सुबह उनसे झगड़ा करके कौन अपना मूड ख़राब करेगा।

उस सड़क पर बर्बाद हुए पानी से और भी बहुत सी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जैसे उन गलियों से पढ़ने जाने वाले बच्चों के कपड़े ख़राब होना नालियों में पानी भरने से मच्छर पैदा होना। सबके गीली हो कर टूट जाना या उन पर काई लग कर बुजुर्गों का गिर जाना। लेकिन अफ़सोस कोई ध्यान देने वाला ही नहीं है कोई कानून ही नहीं है। जब इस देश में अमृत जैसे जल को बर्बाद करने पर कोई सजा नहीं है तो हम उम्मीद भी क्या कर सकते हैं।

बस दिखावे के लिए लिख जरूर देते हैं Save Water Save Life इसके आगे हमे कुछ नहीं आता है।

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