Rakshabandhan एवं नारियल पूर्णिमा का विशेष महत्व है।

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Rakshabandhan Nariyal Purnima
Rakshabandhan Nariyal Purnima

Rakshabandhan रक्षाबंधन एवं नारियल पूर्णिमा क्यों मनाते हैं ?

 

Rakshabandhan और नारियल दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाते हैं।
श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन दोनों पर्व मनाये जाते हैं।

रक्षाबंधन उत्तर भारत का मुख्य त्यौहार है।
वहीं नारियल पूर्णिमा दक्षिण और पश्चिम भारत का विशेष महत्व पूर्ण पर्व है।

यूं तो दोनों फेस्टिवल को पूरे भारत में में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है।

 

Rakshabandhan क्यों मनाया जाता है ?

 

जब भगवान श्री कृष्ण जी के हाथ में चोट लग गई थी। तब द्रोपदी ने उनके हाथ मे अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ कर बाँध दिया था तभी श्री कृष्ण ने ये वचन दिया था।

कि जब भी मेरी बहन तुझ पर कोई आपत्ति आएगी। तब मैं तेरी रक्षा के लिए तेरी एक आवाज़ पर अजाऊँगा।
द्रोपदी के एक आहवान पर श्री कृष्ण ने द्रोपदी लाज़ बचाई थी।

Rakshabandhan
Rakshabandhan Nariyal Purnima

रक्षाबंधन (Rakshabandhan) सही मतलब क्या है ?

 

आज इस Rakshabandhan के पर्व को हमने व्यापार औऱ मज़ाक बना लिया है।
2019 में महाराष्ट्र के सांगली में बाढ़ ने जो कहर बरसाया था।

तब उनकी मदद के लिए सिर्फ सेना के जवान ही आगे आये थे।
तब सांगली की महिलाओं ने सेना के वीर जवानों को राखी बांध कर उनका धन्यवाद किया।

इस घटना ने सबकी आंखें नम करदी और राखी का मतलब भी समझा दिया।
उस समय उनकी मदद के लिये कोई आगे आया।

तो वह थे हमारे सेना के जवान ना पैसा काम आया ना रिश्तेदार और ना वो भाई जिनको बहन राखी बांधती थीं।

जिन्होंने ना जात देखी ना धर्म,
बस किया तो सिर्फ़ अपना कर्म।

तब उन सांगली की बहनों ने भगवान के रूप में आये।
उन फ़ौजी भाइयों को राखी बांधकर यह बता दिया था।
कि यह पर्व कितना महत्वपूर्ण एवं पवित्र है।

सभी देशवासियों को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

नारियल पूर्णिमा कब मनाया जाता है ?

 

नारियल पूर्णिमा भी श्रावण मास की पूर्णिमा को ही मनाई जाती है।
यह पर्व विशेष कर कोली समुदाय के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

कोली समुदाय जो समुन्द्र से मछली पकड़ने का काम करते हैं।
इसलिए मछुआरे इस पूर्णिमा को बड़े धूमधाम से से मनाते हैं।

इस दिन समुन्द्र के देवता वरुणदेव की पूजा की जाती है।
यह पर्व दक्षिण एवं पश्चिम भारत में मनाया जाता है।

 Nariyal Purnima
Rakshabandhan Nariyal Purnima

नारियल पूर्णिमा क्यों मनाते हैं ?

 

मान्यता है कि नारियल पूर्णिमा के दिन कोली समुदाय भगवान वरुण देव की पूजा कर उनसे शांत होने की प्रार्थना करते हैं।

कोली समुदाय की महिलाएं सर पर कलश रख कर उसमें नारियल रखती हैं।
और समुन्द्र तक ढोल नगाड़ों के साथ यात्रा निकालते हैं।

और समुन्द्र पर जाकर समुन्द्र के देवता वरुण देव की विधि विधान से पूजा की जाती है।
उनका मानना है कि इस पूजा से वरुण देव शांत होंगे।

जिस से समुन्द्र में तूफ़ान नही आयेंगे और वर्षा भी बंद हो जायेगी।
जिसके बाद वह अपनी रोज़ी रोटी के लिए समुन्द्र में मछली पकड़ने जा सकेंगे।
इस लिये   नारियल पूर्णिमा का कोली समुदाय में विशेष महत्व है।

नारियल पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

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