Nalanda University

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बिहार के नालंदा जिले में बना Nalanda University दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। 450 ई. पूर्व में इसकी स्थापना हुई थी।
उस समय नालंदा विश्वविद्यालय में विभिन्न देशों के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे।
नालंदा विश्वविद्यालय को गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने बनवाया था।

गुप्तवंश का पतन होने के बाद भी जिस ने भी यहाँ पर राज किया उस राजा का पूरा सहयोग मिला।

महान सम्राट हर्षवर्द्धन ने यहाँ सबसे ज्यादा मठों, विहार एवं मंदिरों का निर्माण करवाया था। हर्षवर्द्धन के बाद पाल शासकों की ओर से भी विश्वविद्यालय को संरक्षण प्राप्त था।

विश्वविद्यालय का अस्तित्व 12वीं शताब्दी तक बना हुआ था।
इतिहास का अध्ययन करने पर पता चलता है कि विश्वविद्यालय में करीब 780 साल तक पढ़ाई हुई थी।
तब बौद्ध धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, जैसे विषयों की पढ़ाई होती थी।
नालन्दा विश्वविद्यालय को विदेशी शासकों की भी सहायता मिलती थी।
नालंदा विश्वविद्यालय के मठों का निर्माण प्राचीन कुषाण वास्तुशैली से हुआ था।
यह दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय था। यहाँ देश विदेश से छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते थे।
और ये सब इसी विश्वविद्यालय में रहते भी थे।
इतिहासकारों के अनुसार यहाँ दस हजार छात्र एक साथ पढ़ते थे। एवं 2000 शिक्षक थे।
इसकी तुलना 378 साल पुरानी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से करें।
तो उसमें 2400 शिक्षक और 21 हज़ार छात्र हैं।

 

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नालंदा विश्वविद्यालय का पतन

नालंदा विश्वविद्यालय को आक्रमणकारियों ने तीन बार नष्ट किया था।
प्रथम आक्रमण 455-467 ई. में स्कन्दगुप्त के शासनकाल के दौरान मिहिरकुल के तहत ह्यून के कारण हुआ था।
लेकिन स्कंदगुप्त के उत्तराधिकारीयों ने पुस्तकालय की मरम्मत करवाई और एक बड़े भवन के साथ पुनर्निर्माण करवाया था।

दिव्तीय आक्रमण 7वीं शताब्दी की शुरुआत में गौदास ने किया था
इस बार बौद्ध राजा हर्षवर्धन 606-648 ई. मे विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण करवाया।

 

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तृतीय आक्रमण

आक्रांता बख़्तियार खिलजी ने सबसे विनाशकारी हमला 1193 में किया था।
जिसने Nalanda University को नष्ट कर दिया था।
नालंदा के महान पुस्तकालय में आग लगा दी और लगभग 9 मिलियन पांडुलिपियों को जला दिया था।
नालंदा विश्वविद्यालय में इतनी किताबें थीं।
कि वह 6 महीने तक जलती रहीं। नालंदा के हजारों विद्वानों और भिक्षुओं की भी हत्या कर दी थी।
ऐसा माना जाता है धार्मिक एवं आयुर्वेद ग्रंथों के जलने के बाद भारत को बहुत बड़ी हानि पहुँची थी।

 

ह्वेनसांग मेमोरियल

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ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल यह एक नवनिर्मित भवन है।
यह भवन चीन के महान तीर्थयात्री ह्वेनसांग की याद में बनवाया गया है।
इसमें उनसे संबंधित दस्तावेज यदि पर रखे गए हैं।
नालंदा विश्वविद्यालय के जलने के बाद उससे जुड़े अधिकांश दस्तावेज समाप्त हो गए थे। ह्वेनसांग ने यहाँ से पढ़ाई करने के बाद इसके बारे में जो कुछ लिखा उससे हमें इस महान स्थान के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिल पाई।

एपीजे अब्दुल कलाम

2006 में पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कालम ने Nalanda University को दोबारा बनाने का सुझाव दिया।
तत्कालीन बिहार सरकार ने राजगीर में यूनिवर्सिटी के लिए 450 एकड़ ज़मीन खरीद कर नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की अगुवाई में 2007 में परियोजना की निगरानी के लिए टीम का गठन किया।

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