Mallikarjuna Jyotirlinga मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग श्रीशैलम का इतिहास

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Mallikarjuna Jyotirlinga
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्रप्रदेश Mallikarjuna Jyotirlinga

Mallikarjuna Jyotirlinga मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है।
यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है एवं बहुत प्राचीन शिव मंदिर भी है।

यह सभी 12 ज्‍योतिर्लिंगों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भी है।
क्‍योंकि यहां पर भगवान शिव एवं माता पार्वती दोनों ही विराजमान हैं।

मान्यता है कि माता पार्वती के 52 शक्ति पीठ में से एक शक्तिपीठ यहीं पर है।
पुराणों के अनुसार माता पार्वती के होंठ से ऊपर का भाग इसी स्थान पर गिरा था।

इसीलिए यह स्थान हिन्दुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थल है।

Mallikarjuna Jyotirlinga
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Mallikarjuna Jyotirlinga मंदिर का इतिहास

 

इस ज्योतिर्लिंग मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है।
यह तो सही सही कोई नहीं जानता कि इस मंदिर का निर्माण कब और किसने करवाया।

किन्तु इस ज्योतिर्लिंग का संदर्भ महाभारत में भी मिलता है।
तमिल संतो ने भी इस ज्योतिर्लिंग की स्तुति प्राचीन काल से की हैं।

आंध्र प्रदेश के इस पवित्र स्थान को दक्षिण का कैलाश भी कहते हैं।
यहां माता पार्वती भ्रमरांबिका एवं भगवान शिव मल्लिकार्जुन के नाम से पूजे जाते हैं।

Mallikarjuna Jyotirlinga
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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर का अस्तित्व

इस मंदिर का इतिहास पुल्लुवामी के नासिक लेख से मिली जानकारी के अनुसार पहली शताब्दी से मिलता है।
इस मंदिर का इतिहास सातवाहन वंश के समय से मिलता है।

यह सातवाहन वंश वहीं साम्राज्य है जो शीशे के सिक्के चलाने वाला पहला राज्य था।
इनके अलावा काकतीय, रेड्डी, पल्लव एवं चालुक्य आदि राजाओं के द्वारा किये गये निर्माण कार्यों का प्रमाण मिलता है।

इन राजाओं ने समय समय पर इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया है।
14 वीं शताब्दी में प्रलयवम रेड्डी ने मंदिर तक सीढ़ीदार मार्ग बनवाया था।

विजयनगर के राजा हरिहर ने मंदिर के मुख्यमंडपम एवं दक्षिण गोपुरम का निर्माण करवाया था।
और 15 वीं शताब्दी में राजगोपुरम का निर्माण कृष्णदेव राय ने करवाया था।

एवं सन् 1667 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस मंदिर के उत्तरी गोपुरम का निर्माण करवाया था।
और यात्रियों के लिए एक धर्मशाला का भी निर्माण करवाया था।

आदि गुरुशंकराचार्य जी ने Mallikarjuna Jyotirlinga मंदिर की यात्रा के समय ही शिवनंदी लहरी पुस्तक की रचना की थी।

Mallikarjuna Jyotirlinga
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मल्लिकार्जुन मंदिर परिसर

Mallikarjuna Jyotirlinga मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर का विशाल परिसर है।
जिस में मल्लिकार्जुन, माता भ्रामराम्बा, नन्दीमंडपा, वीरासीरोमंडपा, के मंदिरों के साथ बहुत से उप मंदिर भी हैं।

इस परिसर में कुछ छोटे मंदिर भी हैं जैसे वृद्ध मल्लिकार्जुन, सहस्त्र लिंगेस्वर, अर्ध नारीश्वर, वीरमद, उमा महेश्वर पांच मंदिरों का समूह है।

एवं पांडव नथिस्टा और 9 मंदिरों की पंक्ति जिसे नव ब्रह्मा मंदिर कहा जाता है।
एवं इस स्थान पर खम्भे, मंडपझरने भी बने हुए हैं।

इस मंदिर परिसर में सबसे सुंदर एवं आकर्षण का केन्द्र विजय नगर काल के समय बनाया गया मुख मंडप है।
यहीं पर नादिकेश्वरा की विशाल मूर्ति भी है।

इसीलिए इस स्थान को दक्षिण का कैलाश भी कहते हैं।

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