Hanuman Ji से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

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Hanuman Ji
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Hanuman Ji से सीखो झुक कर रहना

 

Hanuman Ji से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हनुमान जी के प्रत्येक क़दम पर हम एक ऐसी सीख मिलती है।
जो ज़िंदगी बदल सकती है उनमें से कोई एक मूल मंत्र भी हम अपनी ज़िंदगी में उतार लें तो हम खुशहाल और सफल व्यक्ति बन सकते हैं।

दोहा –      बुद्धि हीन तनु जानि के सुमिरौं पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश बिकार।।

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Hanuman Ji सिखाते हैं झुक कर रहना लेकिन डरना नहीं।
जैसे कि हम सब जानते ही हैं हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त महावीर बजरंबली। उनके आदर्श जीवन में अहंकार का नाश एवं भलाई का रास्ता दिखाते हैं।

आज हम उनके द्वारा कुछ महत्वपूर्ण कार्यों पर विचार करते हैं।
उनसे जानते हैं कि हम उनमें से हम क्या सीख सकते हैं।

 

Hanuman Ji का सूर्य निगलना

 

Hanuman Ji से बचपन में सूर्य निगलने की घटना से लक्ष्य साधना सीख सकते हैं।
जैसे वह सूर्य को आम समझ कर खाने के लिए चले गए।

और सूर्य को निगल भी लिया यह घटना हमे अपना लक्ष्य साधना सिखाती है।
जैसे कि आप कोई कार्य करना चाहते हैं या किसी मुकाम को हासिल करना चाहते हों।

उसको हनुमान जी की तरह करो ना की किसी का इंतजार करो।
अपना लक्ष्य बनाओ फिर उस कार्य या अपने किसी भी सपने को पूरा करने उसी समय लग जाओ।

उम्र चाहें कुछ भी लक्ष्य भी चाहें कितना बड़ा हो लगन के साथ करोगे तो उसके होने से कोई भी नहीं रोक सकता।

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हनुमान जी का राम जी से प्रथम मिलन

 

जैसे कि हम सब जानते हैं जब हनुमान जी विप्र का भेष धारण कर राम जी से प्रथम बार मिले थे।
तब वह इस प्रकार जिज्ञासु होकर चंचल प्रवृति के हो गए थे।
कि अपना भेद दिये बिना राम का सारा भेद पा लिया।

यहां पर हमें हनुमान जी से चतुराई के साथ साथ जिज्ञासु होना सीखना चाहिए।
जब तक आप जिज्ञासु नहीं बनेगें तब तक आप सफल नहीं हो सकते।

चाहें फिर किसी भी प्रोफेशन में क्यों ना हों आप विद्यार्थी हों या टीचर कहीं जॉब करते हो या बिजनेस जिज्ञासु होगें तभी कुछ कर सकते हो।

जब तक किसी के बारे में जानने की इच्छा नहीं रखोगे तब तक उसको जानोगे कैसे और जानोगे नहीं तो उस कार्य को करोगे कैसे ?

हनुमान जी का समुन्द्र लांघना

जब Hanuman Ji समुन्द्र लांघकर कर लंका गए थे।
तब उन्होंने यह नहीं सोचा जाऊंगा कैसे या फिर वापिस कैसे आऊंगा।
और माता सीता वाह पर हैं भी या नहीं।

लेकिन उनका विश्वास उनको ले भी गया और वापिस भी आये।
माता सीता की खोज भी की और लंका जला कर सुबूत भी दे दिया।

कि हम किसी से कम नहीं हैं किन्तु अभी मेरे मालिक की आज्ञा नहीं इसलिए वापिस जा रहा हूं।
यहां पर हनुमान जी से सीखना चाहिए।

कोई भी कार्य करो बिजनेस हो नौकरी विश्वास के साथ करो।
कर्म करो फल की चिंता मत करो विश्वास रखो जो हम कर रहें हैं वह कार्य अवश्य पूर्ण होगा।

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हनुमान जी का संजीवनी लेकर आना

संजीवनी लेने जब हनुमान जी गये थे तब उनके रास्ते में अनेक विपदाएं आईं।
किन्तु वह उन सब को पार करते हुए अपने कार्य में सफल हुए।
संजीवनी लाकर वह कार्य किया को असंभव था।

यहां से हमे यह सीखना चाहिए कि आपके बिज़नेस या जीवन में कितनी भी बाधाएं आयें।
लेकिन मन में विश्वास हो कि मै यह कार्य अवश्य कर जाऊंगा।
तो फिर उस कार्य को पूर्ण होने से कोई नहीं रोक सकता।

Hanuman Ji की तरह विश्वास रखो और अपना लक्ष्य साधते हुए कार्य करते रहो।
विश्वास ही पूर्ण सत्य है।

तभी तो कहते हैं –

दोहा – मोक्ष मिले ना श्री राम के बिना।
संकट कटे ना हनुमान के बिना।।

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