GANGA NADI जीवन है हमारा

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Ganga Nadi
Ganga Nadi

गंगा नदी जीवन रेखा है।

 

Ganga Nadi को माँ भी कहते हैं नदी भी कहते हैं लेकिन कुछ भी हो गंगा है तो जीवन हम मनुष्यों को गंगा नदी से बहुत कुछ मिला है।

गंगा से हमें शुद्व जल मिलता है  उस जल से हम प्यास तो बुझाते ही हैं ।

अपने खेतों में सिंचाई करके अन्न भी उत्पन्न करते हैं गंगा हम भारतीयों की जीवन रेखा भी है।

और हम बदले में माँ गंगा को क्या देते हैं गंदगी आस्था के नाम पर फूल प्रसाद चढ़ाते हैं दिन रात गंदा कर रहें हैं ।

हम अपनी जीवन रेखा को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं क्या आपको नही लगता ये ग़लत है।

Ganga Nadi
Ganga Nadi

 

GANGA के महत्व को समझो

 

आपने सोचा है गंगा जैसी नदी उत्तर प्रदेश में ना होती तो वहाँ के मनुष्य अपना जीवन कैसे जीते बिन पानी के….

अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नही जब….
गंगा इतनी गंदी हो जाएगी कि उसका पवित्र जल पीना तो दूर नहाने योग्य भी नही रहेगा।

कैसा होगा वो दिन मेरी तो सोच कर ही रूह काँप जाती बिन जल का भविष्य कैसा होगा🤔

आपको क्या लगता है गंगा में डुबकी लगाने से आपके पाप दूर हो जायेंगे…

और आप पाप मुक्त हो जायेंगे…नही ऐसा नही होगा।

Ganga Nadi
Ganga Nadi

 

🤔आपको लगता है

 

गंगा में फूल प्रसाद चढ़ाने से आपका कल्याण हो जायेगा…
जी नही…

बल्कि आप एक ऐसी बहती हुई पवित्र धारा को खो देंगे जिसे हमारे ऋषि मुनियों ने गंगा माँ कहा है।

इसलिये नही कि वो हमारे पाप धोयेगी बल्कि इसलिये कि उसमें नहा कर हम अपने तन और मन की मैल साफ़ कर सकें…
और जल पी कर प्यास को शांत कर सकें।

हमारे पूर्वजों ने गंगा के जल से प्यास बुझाई गंगा जल से खेतों की सिंचाई करके अन्न उत्पन्न किया।

गंगा नदी ने माँ की तरह उनका पालन पोषण किया इसलिये हमारे पूर्वजों नें गंगा को माँ गंगा कहना शुरू कर दिया।

और अपनी आने वाली पीढ़ियों से कहने लगे ये हमारी गंगा माँ है ये हमारे लिये पूजनीय है।

उनको क्या पता था कि आने वाली पीढ़ी इतनी बेवकूफ़ निकलेगी वो उसकी पूज ही शुरू कर देगी।

💐और सिर्फ पूजा ही नही पूजा के नाम पर गंगा के पवित्र जल में धूप, दीप, प्रसाद और बाल ना जाने क्या क्या अर्पण करेंगे।

Ganga Nadi
Ganga Nadi

 

इतने मूर्ख हो जाएंगे कि पैसे तक गंगा में चढ़ायेंगे

 

एक तरफ़ तो देश की मुद्रा को नष्ट करेंगे और दूसरी तरफ़ गंगा जल को दूषित करेंगें।

और आस्था के नाम पर एक दिन ऐसा अंधविश्वास जन्म लेलेगा जो सदियों तक चलेगा।

वो आस्था की नदी ऐसा रूप ले लेगी जिसकी तुलना लोग गंदे नाले से करने लगेंगे जिसको हमारे पूर्वज माँ गंगा कहते थे।

अगर आज वो आसमान से देखते होंगे तो उनको पछतावा होता होगा क्यूँ हमने नदी को माँ गंगा कहा…

राजा भगीरथ जी को भी बड़ा दुःख होता होगा जो हिमालय से गंगा को भूभाग पर लेकर आये थे।

आप सबसे मैं हिमांशु धामी निवेदन करता हूँ

माँ गंगा को गंदा मत करो Ganga को नदी ही रहने दो देवी मत बनाओ।

अगले लेख में बताऊंगा गंगा को साफ़ करने में हम अपना कैसे योगदान दे सकते हैं। 👏🏻👏🏻👏🏻

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