चक्र से ग्रह का सीधा संबंध होता है

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चक्र एवं ग्रह

चक्र से ग्रह का सीधा संबंध होता है।
इसलिए आप चक्र जाग्रत कर के भी ग्रह की महादशा से बच सकते हैं।
और अपने जीवन को सुखी एवं समृद्ध बना सकते हैं।
जानते हैं किस चक्र का संबंध किस ग्रह से है |

shani graha
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चक्र से ग्रह का सीधा संबंध होता है -:

1. मूलाधार चक्र- शनिग्रह

मूलाधार चक्र गुदा एवं लिंग के बीच 4 पंखुड़ियों वाला यह आधार चक्र है।
मूलाधार चक्र जाग्रत होने पर वीरता, निर्भीकता एवं आनंद का भाव महसूस होने लगता है|
इस चक्र का संबंध शनिग्रह से है इसलिए इस चक्र को जाग्रत करने से शनिदेव भी प्रसन्न हो जाते हैं।

shukrs graha

2. स्वाधिष्ठान चक्र- शुक्र ग्रह

स्वाधिष्ठान चक्र जो लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर की ओर 6 पंखुड़ियों हैं।
स्वाधिष्ठान चक्र के जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा एवं दुर्गणों से मुक्ति मिलती है।
आपकी कुंडली के अनुसार शुक्रग्रह के पड़ने वाले दुष प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।

mangal graha

3. मणिपुर चक्र- मंगल ग्रह

मणिपुर चक्र नाभि के मूल में है जिसकी 10 पंखुड़ियां हैं।
मणिपुर चक्र जाग्रत होने से तृष्णा, ईर्ष्या, घृणा, मोह एवं भय इत्यादि से मुक्ति मिलती है।
यह चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है।
मंगल दशा का बुरा प्रभाव भी आप नही पड़ता है।
ऐसे मनुष्य कर्म योगी कहलाते हैं।

surya graha

4. अनाहत चक्र- सूर्य ग्रह

अनाहत चक्र 12 पंखुड़ियों सहित 12 स्वर्णाक्षर विद्यमान हैं।
जिनका यह चक्र जाग्रत हो जाता है वह सृजनशील एवं हर क्षण कुछ नया करने की सोचते हैं।
सूर्य देव की विशेष कृपा होती है क्योंकि यह सूर्य देव से संबंध रखता है| इसलिए यह चक्र जाग्रत करने वाले व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे हुए मानवता प्रेमी होते हैं।

brahspati graha

5. विशुद्ध चक्र- बृहस्पतिग्रह

विशुद्ध चक्र कंठ में माँ सरस्वती के साथ विराजमान है जिसमें 16 पंखुड़ियां हैं।
इस चक्र का सीधा संबंध ब्रहस्पति देव से है इसलिए गुरू आपके अनुकूल होते हैं।
इसलिए विशुद्ध चक्र जाग्रत करने वाले मनुष्य को 16 कलाओं एवं 16 विभूतियों का ज्ञान हो जाता है।

budha graha

6. आज्ञाचक्र- बुद्धग्रह

आज्ञाचक्र दोनों आंखों के मध्य भृकुटी में होता है।
इस ग्रह का संबंध सीधा बुद्ध ग्रह से होता है इसलिए यह तेज़ दिमाग वाले बौद्धिक सिद्धि प्राप्त कर लेते हैं।
यह मनुष्य सिद्धपुरुष बन जाते हैं।

chandrama

7. सहस्रार चक्र- चन्द्रमा ग्रह

सहस्त्रार चक्र मस्तिष्क के मध्य भाग में होता है।
इस ग्रह का सीधा संबंध चंद्रमा से होता है इसलिए यह व्यक्ति आनंदमय एवं शांत होते हैं।
यह मनुष्य परमहंस के पद को प्राप्त कर लेते हैं।
इन्हें सिद्धियों की जरूरत नहीं होती है।
भूख प्यास एवं मौसम का प्रभाव भी इन पर नही होता है।
यही मोक्ष का द्वार भी है।

 

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