Bharat Ke Gurukul

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bharat ke gurukul
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Bharat Ke Gurukul में एक अलग ही भारत के दर्शन होते थे।

  • भारत के गुरुकुलों में शिक्षा ग्रहण एवं विद्यार्थियों के भोजन का ख़र्च विद्यार्थियों से नहीं लिया जाता था। कहतें हैं कि bharat ke gurukul में शिक्षा व्यवस्था उच्च प्रणाली की हुआ करती थी। किन्तु समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है जो भारत में भी हुआ। यहां पर प्रत्येक गांव में एक गुरुकुल हुआ करता था।
    गुरुकुल में साधु संत बच्चों को पढ़ाते थे।
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  • आप यही सोच रहे होंगे कि साधु संत क्या पढ़ाते होंगें?
  • हम आपको बतादें भारत की गुरुकुल व्यवस्था में योगा, गौ पालन, खेती करना, समाज शास्त्र, वैदिक संस्कृति, आयुर्वेद चिकित्सा, चित्रकला, विज्ञान, गणित एवं अर्थ शास्त्र का ज्ञान देते थे।
    जो भारत के इन गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण कर लेते थे।
    वह अपने जीवन में मानो सब कुछ ग्रहण कर लेते हों।
    गुरुकुल से शिक्षा लेने के बाद वह छात्र कभी हार नहीं मानते थे।
    अपने कार्यों को कर्तव्य पूर्ण निर्वाह करते थे।
    इसलिए तो विदेशों से भी बहुत से छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए भारत आते थे।
    हमारा पुराना भारत प्रकृति प्रेमी उच्च शिक्षा एवं व्यापार में प्रथम स्थान रखता था।
    वह भारत मानो कहीं खो गया है। और किताबों के कुछ पन्नों में इतिहास बन कर रह गया है।
  • भारत के गुरुकुलों में शिक्षा ग्रहण एवं विद्यार्थियों के भोजन का ख़र्च विद्यार्थियों से नहीं लिया जाता था।
  • उस सारे ख़र्च की व्यवस्था उस गांव के लोग मिल जुल कर उठाते थे।
    उन विद्यालयों में उच्च शिक्षा एवं उत्तम भोजन प्रत्येक छात्र को दिया जाता था।
    बिना किसी भेद भाव के सभी को समान रूप से शिक्षा ज्ञान उनकी योग्यानुसार दिया जाता था।
    इसका एक उदाहरण आज भी नालंदा विश्वविद्यालय के रूप में हमारे बीच में है।
  • bharat ke gurukul
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  • अंग्रेजी सरकार की नई शिक्षा नीति

  • जब अंग्रेजों ने इस शिक्षा व्यवस्था को देखा तब वह अचंभित हो गए।
    उन्होंने यह मान लिया था। जब तक भारत के गुरुकुलों में यह शिक्षा प्रणाली जीवित रहेगी।
    तब तक हम india को गुलाम नहीं बना सकते।
    ब्रिटिश सरकार के दौरान शिक्षा मिशनरियों का प्रवेश हुआ था।
    उस समय महत्वपूर्ण शिक्षा दस्तावेज में मैकाले का घोषणा पत्र 1835, वुड का घोषणा पत्र 1854 एवं हण्टर आयोग 1882 सम्मिलित हैं।
  • अंग्रेजी सरकार में शिक्षा का उद्देश्य अंग्रेजों के राज्य में शासन सम्बन्धी हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया था।
    कुछ लोग इसे मैकाले की शिक्षा प्रणाली के नाम से भी पुकारते हैं। लार्ड मैकाले ब्रिटिश पार्लियामेन्ट के ऊपरी सदन (House of lords) का सदस्य था।
  •  1857 की क्रान्ति के बाद जब 1860 में भारत के शासन को East India company से छीनकर Queen Victoria के अधीन किया गया।
    तब Thomas Babington Macaulay को india में British Government के शासन को मजबूत बनाने के लिये।
    आवश्यक नीतियां बनाने का महत्वपूर्ण कार्य दिया गया।
    Macaulay ने सारे देश का भ्रमण किया।

सभी जातियों के लोग

  • उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ-  कि यहां झाडू लगाने वाला, चमड़ा उतारने वाला, करघा चलाने वाला, कृषक, व्यापारी (वैश्य) एवं मंत्र पढ़ने वाला आदि।
  • सभी जातियों के लोग अपने-अपने कार्य को बड़ी श्रद्धा भाव से हंसते-गाते कर रहे थे।
    सारा समाज संबंधों की डोर से बंधा हुआ था।
  • शूद्र भी समाज के सभी लोगों का भाई, चाचा ताऊ अथवा दादा एवं ब्राहमण भी ऐसे ही रिश्तों से बंधा हुआ था।
    बेटी गांव की हुआ करती थी एवं दामाद, मामा आदि रिश्ते गांव के हुआ करते थे।
    इस प्रकार भारतीय समाज भिन्नता के बीच भी एकता के सूत्र में बंधा हुआ था।
    इस समय धार्मिक सम्प्रदायों में भी अच्छे संबंध हुआ करते थे।
  • यह भी एक ऐतिहासिक सत्य है कि 1857 की क्रान्ति में हिन्दू-मुसलमान दोनों ने साथ में अंग्रेजों का विरोध किया था।
    Macaulay को लगा कि जब तक हिन्दू-मुसलमानों के बीच मत भेद नहीं होंगे।
    अथवा की एकता जातियों में नहीं बटेगी तब तक भारत पर British Government का शासन मजबूत नहीं होगा।
Nalanda University -Read…
  • bharat ke gurukul
    bharat ke gurukul
  • उसके बाद शुरू हुआ भारतीय शिक्षा प्रणाली का पतन।
  • 1858 में Lord Macaulay द्वारा Indian Education Act बनाया गया।
    Macaulay की सोच स्पष्ट थी। जो की उसने England की संसद में बताया था।
  • उसने पूरी तरह से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म कर के English Education (जिसे हम मैकाले शिक्षा व्यवस्था भी कहते है) व्यवस्था को लागू कर दिया गया।
  • इस प्रकार भारत के गुरुकुल एवं गांव की सभ्यता समाप्त होती चली गई।
    और आज हम भारत से बाहर निकल कर  india में रहने लग गए हैं।

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