देवी अहिल्या बाई होल्कर

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देवी अहिल्या बाई होल्कर
देवी अहिल्या बाई होल्कर

देवी होल्कर बाई होल्कर इंदौर कर माहिष्मती राज्य की महारानी थीं।
वह एक न्याय पिर्य महान योद्धा थीं। तीरंदाजी में तो मानो उनका मुकाबला कोई कर ही नही सकता था।

देवी अहिल्या बाई का न्याय

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जब देवी अहिल्याबाई होल्कर न्याय के लिए बैठतीं थीं।

तब उनके हाथ में मिट्टी का बना हुआ एक शिवलिंग होता था।

उनका मानना था न्याय मैं नही भगवान शिव कर रहें हैं।
मैं तो माध्यम मात्र हूँ।

नर्मदा नदी के तट पर वह प्रतिदिन 11 हजार मिट्टी के शिवलिंग की पूजा करके नर्मदा में विसर्जित किया करती थीं। प्रजा की शुखशांति के लिए। जो कि आज भी प्रतिदिन 11 ब्राह्मणो द्वारा किया जाता है।

उनके उच्च विचार, न्याय व्यवस्था, जनकल्याण कारी योजनायें एवं मुग़लो द्वारा सुरक्षा व्यवस्था में निपुण थीं।

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देवी की उपाधि

संसार मे बहुत राजा महाराजा एवं महारानी हुए हैं। जिनका नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है। किन्तु महारानी अहिल्या बाई होल्कर ही एक मात्र ऐसी जनपालक न्यायमूर्ति थीं जिनको देवी की उपाधि दी गई ।
देवी अहिल्या बाई होल्कर।

ELLORA CAVES इंसानों द्वारा बनाई गई एक बेमिसाल…

जन्म से मृत्यु तक

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देवी अहिल्या बाई का जन्म 31 मई सन 1725 को महाराष्ट्र चाऊडी गांव में हुआ था।
1795 को देवी अहिल्या बाई की मृत्यु हो गई थी।
जो हम सब के लिए बहुत बड़ी क्षति थी।

इस बीच उन्होंने बहुत से मंदिरों का जीणोद्धार कराया जिनमें सोमनाथ प्रमुख था एवं धर्मशालाएं बनवाईं।
आज भी हम उनको अपने दिलों में जीवित ही पाते हैं।
एवं उनके उच्च विचार हमेशा मार्गदर्शन करते रहेंगें।

देवी अहिल्या बाई होल्कर

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